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आजादी के जश्न से बापू क्यों रहे दूर

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लोकनाथ तिवारी 15 अगस्त 1947 में इसी दिन भारत को ब्रिटिश हुकूमत से आजादी मिली थी. अंग्रेजों से भारत को आजादी दिलाने में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अहम भूमिका रही थी. लेकिन क्या आपको इस बात की जानकारी है कि जब भारत को आजादी मिली थी तो महात्मा गांधी इस जश्न में नहीं थे. तब वे दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर बंगाल के नोआखाली में थे, जहां वे हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच हो रही सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन कर रहे थे.  आजादी की निश्चित तिथि से दो सप्ताह पहले ही गांधीजी ने दिल्ली को छोड़ दिया था. उन्होंने चार दिन कश्मीर में बिताए और उसके बाद ट्रेन से वह कोलकाता की ओर रवाना हो गए, जहां साल भर से चला रहा दंगा खत्म नहीं हुआ था. 15 अगस्त 1947, को जब भारत को आजादी मिली थी तब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी इस जश्न में शामिल नहीं हो सके थे, क्योंकि तब वे दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर बंगाल के नोआखली में थे, जहां वे हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच हो रही सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन कर रहे थे. गांधीजी ने 15 अगस्त 1947 का दिन 24 घंटे का उपवास करके मनाया था. उस वक्त देश को आजादी तो मिली थी...

स्वतंत्रता दिवस 2020 : आजादी के समय सोना था 100 रुपये के नीचे और रुपया था डॉलर के बराबर

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 लोकनाथ तिवारी क्या आप जानते हैं कि 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ था उस समय 1 रुपया 1 डॉलर के बराबर था और सोने का भाव 88 रुपए 62 पैसे प्रति 10 ग्राम था. आज 74.81 रुपये के बराबर 1 डॉलर है, जबकि प्रति 10 ग्राम सोने का रेट 52 हजार से ऊपर है.  14 अगस्त की मध्यरात्रि को जवाहर लाल नेहरू ने अपना ऐतिहासिक भाषण 'ट्रिस्ट विद डेस्टनी' दिया था. इस भाषण को पूरी दुनिया ने सुना था लेकिन महात्मा गांधी ने इसे नहीं सुना क्योंकि उस दिन वे जल्दी सोने चले गए थे. हर साल स्वतंत्रता दिवस पर भारत के प्रधानमंत्री लाल किले से झंडा फहराते हैं, लेकिन 15 अगस्त, 1947 को ऐसा नहीं हुआ था. लोकसभा सचिवालय के एक शोध पत्र के मुताबिक नेहरू ने 16 अगस्त, 1947 को लाल किले से झंडा फहराया था.  भारतीय डाक विभाग द्वारा कई डाक संग्रहण प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका अदा कर चुके कोलकाता निवासी शेखर चक्रवर्ती ने अपने संस्मरणों फ्लैग्स एंड स्टैम्प्स में लिखा है कि 15 अगस्त 1947 के दिन वायसराइल लॉज (अब राष्ट्रपति भवन ) में जब नई सरकार को शपथ दिलाई जा रही थी, तो लॉज के सेंट्रल डोम पर सुबह साढ़े दस बजे आजाद भारत का...

गांधीवादी लोकनाथ तिवारी GANDHIWADI LOKENATH TIWARY

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गांधीवादी ब्लॉग के रचयिता लोकनाथ तिवारी (Lokenath Tiwary) महात्मा गांधी के विचारों को प्रसारित करते हैं. बापू के विचारों का अनुसरण करते हैं. पेशे से पत्रकार लोकनाथ मूलतः उत्तर प्रदेश के बलिया के रहनेवाले हैं. फिलहाल वह कोलकाता  में रहते हैं. उन्होंने कोलकाता के सन्मार्ग (Sanmarg) समाचार पत्र से पत्रकारिता करियर की शुरुआत की. उसके बाद राजस्थान पत्रिका (Rajasthan Patrika ) कोलकाता संस्करण में संपादकीय प्रभारी रहे. कोल इनसाइट्स (Coal Insights), स्टील इनसाइट्स (Steel Insights), प्रभात वार्ता (Prabhat Varta), प्रभात खबर (Prabhat Khabar), समाज्ञा (Samagya) और रिपब्लिक हिंदी (Republic Hindi) में अपनी सेवाएं दीं. रिपोर्टिंग, संपादन, प्रिंट और डिजिटल मीडिया की विभिन्न विधाओं में उनको महारत हासिल है.

गांधी आज भी उतने ही प्रासंगिक

लोकनाथ तिवारी बापू की पुण्यतिथि पर विशेष बापू और महात्मा के नामों से जाने-जानेवाले युगपुरुष, सत्य, अहिंसा, कर्तव्यपराण्यता, सहनशीलता एवं संवेदनशीलता की प्रतिमूर्ति मोहनदास करमचंद गाँधी की पुण्यतिथि पर उनको भावभीनी श्रद्धांजलि.  महात्मा गांधी जी का ऐसा मानना था कि व्यक्ति के विचारो में परिवर्तन ला कर बड़ी से बड़ी जंग जीती जा सकती है. गांधीजी ने अपने विचारों के माध्यम से राजनीतिक, दार्शनिक, सामाजिक एवं धार्मिक क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन किये. उन्होंने सबको सत्य एवं अहिंसा के मार्ग पर चलने का सन्देश दिया. वह  एक समाज सुधारक भी थे. उन्होंने नीची जाति के लोगो के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. छुआ-छूत का विरोध किया. निम्न जाति के लोगो को आदरसूचक शब्द हरिजन कह कर बुलाना प्रारंभ किया जिसका शाब्दिक अर्थ “ईश्वर की संतान” है. राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश जी का मानना है कि गांधी विकल्पहीन हैं. 72 साल पहले 30 जनवरी के दिन नाथूराम गोडसे नामक हत्यारे ने अहिंसा के इस पुजारी की हत्या कर दी थी. दूसरी ओर अखिल भारतीय हिंदू महासभा की नेता पूजा पांडे जैसे लोग भी हैं जो गांधी जी के पु...

अरबपति ब्वॉयफ्रेंड की तलाश ऐसे होगी पूरी

लोकनाथ तिवारी  एक अरबपति युवक ने गर्लफ्रेंड के लिए वैकेंसी निकाली हैं. 17 जनवरी तक आवेदन करने का अवसर है. बशर्ते लड़की की उम्र 20 वर्ष से अधिक हो और वह उसके साथ चांद पर जाने की इच्छुक हो. जापानी अरबपति युसाका मैजवा ने स्पेसएक्स रॉकेट के जरिए चांद पर जाने की योजना बनाई है. अमेरिकी अरबपति एलन मस्क के स्पेसएक्स रॉकेट के जरिए युसाका चांद पर जाने वाले पहले प्राइवेट पैसेंजर होंगे. वे 2022 में चांद पर जा सकते हैं.  44 साल के युसाका 20 साल से अधिक उम्र की सिंगल लड़की को गर्लफ्रेंड के रूप में तलाश रहे हैं. युसाका मैजावा ने अपने वेबसाइट पर उन्होंने लिखा है- जैसा कि अकेलापन और खालीपन धीरे-धीरे मेरे भीतर बढ़ रहा है, मैं एक चीज के बारे में सोचता हूं वो है-एक महिला को प्यार करना. युसाका ने कहा है कि गर्लफ्रेंड के रूप में उन्हें लाइफ पार्टनर की तलाश है. उन्होंने कहा है कि वे आउटर स्पेस से अपने प्यार और वर्ल्ड पीस (वैश्विक शांति) के लिए अपील करना चाहते हैं. हाल ही में युसाका 27 साल की एक्ट्रेस गर्लफ्रेंड अयमे गोरिकी से अलग हुए हैं. युसाका की गर्लफ्रेंड बनने के लिए अप्लाई करने वालीं लड़किय...

दिल्ली में केजरीवाल के खिलाफ नेता नहीं तय कर पा रही बीजेपी या कांग्रेस

लोकनाथ तिवारी दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी (आप), भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस ने तैयारी शुरू कर दी है. आप एक बार फिर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में ही मैदान में उतर रही है, इसमें कोई संदेह नहीं है. फिलहाल आप में कोई अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व को चुनौती देता नहीं दिख रहा. दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने की पुरजोर कोशिश कर रही बीजेपी का नेता कौन होगा, यह स्पष्ट नहीं है. कांग्रेस में भी कमोबेश वही स्थिति है. दो दशक से अधिक समय से दिल्ली की सत्ता से दूर रही बीजेपी से मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा, इसे लेकर स्थिति अस्पष्ट है. बीजेपी विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल के मुक़ाबले प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी को सीएम उम्मीदवार के रूप में शायद ही उतारे. पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह, सहित अन्य नेताओं को सामने रखकर सामूहिक नेतृत्व में ही बीजेपी चुनाव लड़ सकती है.  हालांकि सोशल मीडिया पर कुछ बीजेपी समर्थक मनोज तिवारी फॉर दिल्ली सीएम ग्रुप बनाकर अभियान चला रहे हैं. दिल्ली विधानसभा चुनाव के प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर का भी मानना है कि फिलहाल बीजेपी ने नेतृत्व ...

मनोज वाजपेयी को याद है मोतिहारी की छठ पूजा, माई की हिदायत

लोकनाथ तिवारी बिहार में छठ का क्या महत्व है इसे जानने के लिए इस पर्व की तैयारी में जुटे किसी बिहारी परिवार को देख लीजिए. कलक्टर हो या चपरासी, वीआईपी हो या आम आदमी छठ माई के समक्ष हर कोई विनम्र और नत मस्तक हो जाता है. बिहारी लोग देश के किसी भी कोने में क्यों ना हों छठ पर्व को पूरे रीति-रिवाज से मनाते हैं. बॉलीवुड के सितारे हों या शीर्ष अधिकारी छठ पर्व पर अपने गांव-घर में ही मनाना चाहते हैं. अगर किसी कारणवश गांव नहीं भी जा पाते तो जहां होते हैं वहीं छठ व्रत करते हैं. छठ आते ही बॉलीवुड के स्टार मनोज वाजपेयी को मोतिहारी के गांव की छठ पूजा, कांचहि बांस के बहंगिया, अर्घ्य और कोसी भरने की याद आने लगती है. बॉलीवुड के स्टार मनोज वाजपेयी ने मीडिया से बातचीत में अपने गांव की छठ की स्मृतियों को ताजा की. इस छठ पर मनोज को मलाल है कि मोतिहारी स्थित अपने गांव नहीं जा पाये हैं लेकिन घर की छठ उनकी यादों में आज भी घूम रही है. वे कहते हैं, दुनिया में चाहे जहां रहूं, लेकिन छठ पर्व आते ही मेरा मन अपने गांव बेलवा में घूमने लगता है. माई-बाबूजी का वहां रहना और भी खींचता है. अर्ध्य देने के लिए दउरा सिर पर रख...

बाहुबली बीजेपी, खंड-खंड विपक्ष

Lokenath Tiwary (लोकनाथ तिवारी) लोकसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के सदमे से विपक्षी पार्टियां खंड खंड हो रही हैं. विपक्षी गठबंधन टूट रहा है. पार्टियों में अंदरूनी मतभेद और इस्तीफों का दौर भी देखने को मिल रहा है. चुनाव में मिली करारी हार के बाद से ही विपक्षी खेमे में उथल-पुथल मची हुई है. कांग्रेस में जहां आपस में ही आरोप-प्रत्यारोप जारी है वहीं अन्य पार्टियां अलग-अलग राह पकड़ रही हैं. कांग्रेस में सबसे ज्यादा विवाद राजस्थान इकाई में है. मुख्यमंत्री अशोक गहलौत ने अपने बेटे की हार के लिए उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को जिम्मेवार ठहराया है, जबकि पायलट समर्थक राज्य में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए गहलौत को जवाबदेह ठहराते हुए उन्हें पद से हटाकर पायलट को सीएम बनाने की मांग करने लगे हैं. गुजरात में कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीजेपी खेमे में जाने की अटकलों के बीच ऐसा ही हाल गुजरात कांग्रेस में भी नजर आ रहा है. हरियाणा में हाल में प्रदेश समन्वय समिति की बैठक के दौरान नेताओं ने एक दूसरे पर उंगलियां उठायीं. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में अपना खाता खोलने में न...

रुपया गिर रहा है जनाब, संभालिए

Lokenath Tiwary (लोकनाथ तिवारी) किसी देश की मुद्रा उसकी अर्थव्यवस्था की सेहत को स्पष्ट करती है. मुद्रा को संचालित करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी उस देश की सरकार की होती है. अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव गहराने से बीते कुछ सप्ताह से रुपये में गिरावट बनी हुई है. छह सितंबर को पहली बार रुपया, डॉलर के मुकाबले 72 के नीचे लुढ़का था. डॉलर के मुकाबले रुपये के अवमूल्यन को रोकने के लिए कारगर कदम जरूर उठाए जाने चाहिए. इसमें रिजर्व बैंक की भूमिका महत्वपूर्ण है. जानकारों के अनुसार हमें निर्यात को प्रोत्साहित करना होगा और आयात नियंत्रित करने होंगे, ताकि व्यापार घाटा को कम किया जा सके. डॉलर-रुपये की सट्टेबाजी पर भी अंकुश लगाना होगा. 2013 में तत्कालीन मनमोहन सिंह की सरकार ने इस प्रकार के कुछ कदम उठाए भी गए थे, जिसका सकारात्मक असर हुआ था. डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये को संभालने के लिए नरेंद्र मोदी के नेतृत्ववाली सरकार भी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के तरीके को अपना सकती है. डॉलर डिपॉजिट स्कीम (एनआरआई बॉन्ड) केन्द्रीय रिजर्व बैंक अब अप्रवासी भारतीयों (एनआरआई) की मदद लेने की तैयारी कर रही है. ...

लोकसभा चुनाव में असर दिखायेगा एनआरसी का चुनावी गणित

असम में नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन (एनआरसी) का मुद्दा अभी चर्चा में है. इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी सबसे अधिक मुखर हैं. बीजेपी भी इस मुद्दे पर आक्रामक है. लोकसभा चुनाव 2019 के पहले इस मुद्दे को हवा देने के पीछे राजनीतिक कारण है. जानकारों के अनुसार एनआरसी का असर पश्चिम बंगाल के कम से कम 17 लेकसभा सीटों पर पड़ेगा. इसके अलावा असम, बिहार और नॉर्थ ईस्ट में भी इसका असर दिखायी देगा. चार राज्यों की जिन मुस्लिम बहुल 40 सीटों पर एनआरसी का बड़ा असर पड़ सकता है उनमें से महज 8 बीजेपी के पास हैं. इनमें से बंगाल में उसके पास 17 में से एक भी सीट नहीं है. पश्चिम बंगाल की 17 सीटों मुर्शिदाबाद, रायगंज, बहरमपुर, बशीरहाट, मालदा उत्तर, मालदा दक्षिण, डायमंड हार्बर, जयनगर, बीरभूम, कृष्णानगर, बोलपुर, जंगीपुर, कूच बिहार, उलूबेड़िया, मथुरापुर, जादवपुर, बर्धमान में मुस्लिम आबादी प्रभावी है. बीजेपी के पास इनमें से एक भी सीट नहीं है. इसके अलावा असम, पश्चिम बंगाल, बिहार व पूर्वोत्तर की 78 लोकसभा सीटों पर एनआरसी का मुद्दा बड़ा असर डालेगा. असम की छह लोकसभा सीटों के अलावा जम्मू कश्मीर में भी मुस्लिम आबाद...

क्या आप जानना चाहेंगे, किस उम्र में शादी करनी सबसे सुखद होगी, तो पढ़िये यह रिसर्च रिपोर्ट

Lokenath Tiwary (लोकनाथ तिवारी) भाई साहेब आप शादीशुदा हैं, जी नहीं वैसे ही दुखी हूं. बगैर शादी किये दुखी हैं और शादी के लड्डू का स्वाद लेना चाहते हैं तो यह रिसर्च आपके लिए ही की गयी है. आप शादी करने जा रहे हैं या शादी की सफलता को लेकर चिंतित हैं. फिर आपको इस शोधपरक रिपोर्ट को अवश्य पढ़ना चाहिए. अमेरिका के एक विश्वविद्यालय की ओर से अलग-अलग उम्र में शादी करनेवालों की शादी की असफलता और तलाक लेने के आंकड़ों पर रिसर्च कर एक रिपोर्ट तैयार की है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि शादी करने की कौन सी उम्र सबसे अच्छी है. कौन सी उम्र में शादी करना ज्यादा खतरनाक है. अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ ऊटा में किये गये रिसर्च के अनुसार शादी के लिए 30 से 34 साल की उम्र सर्वोत्तम होती है. इस उम्र में शादी करनेवाले जोड़े का पहले पांच वर्ष में तलाक होने की संभावना सबसे कम यानी 10 फीसदी होती है. 35 वर्ष या इससे अधिक उम्र में शादी करनेवालों में विच्छेद होने की संभावना 17 फीसदी होती है. अर्थात ऐसे लोगों में तलाक की संभावना 7 फीसदी बढ़ जाती है. ऊटा विश्वविद्यालय में सात साल के शोध बाद यह आंकड़ा हासिल हुआ है. इस र...

तबाही की ओर बढ़ रहा पाकिस्तान, फिर कैसे शांति से रह सकता है हिंदुस्तान

लोकनाथ तिवारी (Lokenath Tiwary) हमारे जीवन में परिवारवालों के बाद सबसे महत्वपूर्ण स्थान अगर किसी के लिए होता है तो वे हैं हमारे पड़ोसी, जिनको चाहकर भी हम बदल नहीं सकते. हमारे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी शायद पड़ोसियों से परेशान होकर या उनके प्रति अपना अगाध प्रेम प्रदर्शित करने के लिए ही कहा होगा कि आप मित्र तो बदल सकते हैं,शत्रु भी बदले जा सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं बदले जा सकते. हमारा देश भी पड़ोसियों के मामले में भाग्यहीन ही है. सबसे करीबी पड़ोसी पाकिस्तान तो तबाही की ओर बढ़ता हुआ देश घोषित किया गया है. फ्रेजाइल स्टेट्स इंडेक्स 2017 में पाकिस्तान 18वें पायदान पर है. वह भी इस साल स्थिति में सुधार होने के बाद. फ्रेजाइल स्टेट्स इंडेक्स में ऐसे देशों को शामिल किया जाता है, जिन्हें खुद की सुरक्षा की चिंता करनी चाहिए. यदि आतंकवादी पाक पर पकड़ बना लेते हैं तो यह सिर्फ पाकिस्तान के लिए नहीं, बल्कि विश्व के लिए भी खतरनाक होगा. पाकिस्तान के शासकों को देश को इस खतरे से बचाने के लिए व्यापक नीति बना कर अमल में लाने की दिशा में प्रयास शुरू कर देना चाहिए. पाकिस्तान के बारे में तो क...

गिरते हैं शहसवार ही मैदाने जंग में

गिरते हैं शहसवार ही मैदाने जंग में लोकनाथ तिवारी (Lokenath Tiwary) ’वैलेंटाइन डे’ का मौसम शुरू हो गया है। कुछ देकर दिल लेने या देने की परंपरा हमारे देश में कहाँ से आई, इसका कोई ऑथेंटिक इतिहास नहीं मिल पाया है। ’रोज डे’, ’प्रपोज डे’, ’चॉकलेट डे’, टेडी बीयर डे, ’हग डे’ और ’किस डे’ के बाद वैलेंटाइन डे का बहुप्रतीक्षित दिवस आता है। इन दिनों को माध्यम बनाकर प्रेमी युगल एक दूसरे के प्रति अपने दिल की भावनाओं को उजागर करते हैं। हाँ, इसके पहले कुछ न कुछ देकर अपनी सुरक्षा पुख़्ता करने की कोशिश जरूर की जाती है। स्वयंभू प्रेमगुरुओं का मानना है कि पहले किसी के समक्ष प्रेम का इजहार करना खतरे से खाली नहीं होता था। पता नहीं कब लेने के देने पड़ जाए। कुछ देकर खुश करने के बाद अपने दिल की भावनाओं को जुबान देने में कम खतरा होता है। पहले तो चिट्ठियों के माध्यम से दिल की बात कही जाती थी, जिसमें बहुत खतरा भी होता था। खत के साथ गुलाब या गेंदे का फूल भी होता था। साथ में यह करबद्ध अनुनय विनय भी होती थी कि इसे अपने भाई, पिता या काका के हाथ में नहीं पड़ने दें। भले ही प्रेम प्रस्ताव ठुकराकर राखी बाँधने की नौबत आ ...

आखिर जवाब दे गया खड़ाऊं वंदन

आखिर जवाब दे गया खड़ाऊं वंदन लोकनाथ तिवारी सैकड़ों कीमती सैंडल पहननेवाली तमिलनाडु की अम्मा अब जन्नतनशीं हो गयी हैं। आप सोच रहे होंगे कि उनके सैंडल अनाथ पड़े कहीं ध्ाूल फांक रहे होंगे। ऐसी कल्पना कर दुखी होने की जरूरत नहीं है क्योंकि इन सैडलों की चरणध्ाूलि लेनेवालों की तमिलनाडु की धरा पर कोई कमी नहीं। अपने पन्नीरसेल्वम तो उनके अनाथ पड़े सैंडल को तख्त पर विराजमान कर दिये थे। जिस तरह राम जी के वनवास गमन के बाद भरत ने उनके खड़ाऊं को सिंहासन पर रख अयोध्या पर राज किया उसी तरह से अम्मा के सैंडल को तख्त पर रख कर यह बंदा भरत सरीखा फर्ज अदा करने में व्यस्त रहा। अम्मा के जेल जाने से लेकर बीमार होने और उसके बाद अकाल स्वर्गवासी होने तक  उनके फैन्स बिलख-बिलख कर रोते रहे। अम्मा के अकाल प्रयाण पर इनका रोना जायज भी है। इस कुनबे के मंत्री भी रोने में हम किसी से कम नहीं की तरह कम्पीटिशन लगाये रहे। कैमरे व मीडिया के सामने तो इनकी आंसुओं की धार गंगा, जमुना, घाघरा, नर्मदा सहित कई नदियों को पानी-पानी करने के लिए काफी था। सबसे अधिक बिलखनेवाले पन्नीरसेल्वम को पूर्व की भांति ताज मिला। अपने पन्नीरसेल्वम के बा...

वादा पे तेरे मारा गया...

वादा पे तेरे मारा गया... हर च्ाुनाव के पूर्व राजनीतिक पार्टियां लोकलुभावन वादे करती हैं। पढ़े लिखे समझदार होने का दावा करने वाले सीधे सादे बंदे इन वादों पर अपना वोट वार देते हैं। माना जाता है कि चुनाव के हर मौसम की एक थीम होती है। अक्सर कोई एक मुद्दा होता है, जिस पर चुनाव लड़े जाते हैं। या फिर कुछ वादे होते हैं, हर बार चर्चा का कोई एक मामला तो होता ही है, जिसके आस-पास चुनाव होते हैं। इस बार के विधानसभा चुनावों की थीम है- देसी घी। कम से कम पंजाब से लेकर उत्तर प्रदेश तक चुनाव देसी यानी शुद्ध घी और उसके वादे के आस-पास लड़े जा रहे हैं। शुरुआत पंजाब से हुई। वहां भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में कहा कि उनका गठबंधन अगर सत्ता में आया, तो निम्न वर्ग के नीले राशन कार्डधारकों को 25 रुपये प्रति किलो की दर से देसी घी दिया जाएगा। यह मामला दिलचस्प इसलिए है कि पंजाब के इस गठजोड़ में भाजपा दूसरे नंबर की सहयोगी है, पहले नंबर का या नेतृत्व करने वाला बड़ा सहयोगी अकाली दल है, जिसने अपने चुनाव घोषणापत्र में हर गांव में मुफ्त वाई-फाई और क्लोज सर्किट टीवी की बात तो की, लेकिन देसी घी उसमें कहीं नहीं था। बाद में ...

हमारे संस्कृति प्रेमी योद्धा

लोकनाथ तिवारी (Lokenath Tiwary) संस्कृति प्रेमी योद्धाओं के समर्थन में सड़कछाप ज्ञानियों व बयानवीरों की फौज मुखर हो गयी है। उन्हें शायद यह नहीं पता कि जयपुर के जयगढ़ किले में करणी सेना के लोगों ने फिल्म डायरेक्टर संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट करके राजस्थान की उस महान सांस्कृतिक दृष्टि का अपमान किया है जो अपने संगीत और कलाप्रेम के लिए पूरी दुनिया में पहचानी और सराही जाती है। उन्होंने निर्माणाधीन फिल्म ‘पद्मावती’ की उस स्वघोषित स्क्रिप्ट को लेकर फिल्म यूनिट के खिलाफ हिंसा का रास्ता चुना जिसे वह जानते तक नहीं थे। इससे वह सभी जगहों पर हास्य के पात्र भी बने हैं। कलाकार की वह रचना जो अभी सामने ही नहीं आई, जिसके स्वरूप के बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं, उसपर इस तरह का विरोध सरासर नाजायज ही कहा जाएगा।  भंसाली प्रॉडक्शन्स ने स्पष्ट कहा है कि फिल्म की पटकथा में पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच कोई रोमांटिक दृश्य नहीं है। भंसाली प्रॉडक्शन ने साफ किया कि पद्मावती और खिलजी के किरदारों के बीच कोई भी आपत्तिजनक या फिर रोमांटिक सीन नहीं फिल्माया गया है। जब फिल्म बनकर रिलीज होती और फिर यह बात ...

सम्मान दें बजुर्गों के तजुर्बे को

लोकनाथ तिवारी (लोकनाथ तिवारी) बालगंगाधर तिलक ने एक बार कहा था कि ‘तुम्हें कब क्या करना है यह बताना बुद्धि का काम है, पर कैसे करना है यह अनुभव ही बता सकता है।’ किसी ने सच ही कहा है: ‘फल न देगा न सही, छाँव तो देगा तुमको। पेड़ बूढ़ा ही सही, आंगन में लगा रहने दो।’ बुजुर्ग अनुभवों का वह खजाना है जो हमें जीवन पथ के कठिन मोड़ पर उचित दिशा निर्देश करते हैं। बुजुर्ग घर का मुखिया होता है इस कारण वह बच्चों, बहुओं, बेटे-बेटी को कोई गलत कार्य या बात करते हुए देखते हैं तो उन्हें सहन नहीं कर पाते हैं और उनके कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं जिसे वे पसंद नहीं करते हैं। वे या तो उनकी बातों को अनदेखा कर देते हैं या उलटकर जवाब देते हैं। जिस बुजुर्ग ने अपनी परिवार रूपी बगिया के पौधों को अपने खून पसीने रूपी खाद से सींच कर पल्लवित किया है, उनके इस व्यवहार से उनके आत्म-सम्मान को ठेस पहुँचती है। एक समय था जब बुजुर्ग को परिवार पर बोझ नहीं बल्कि मार्ग-दर्शक समझा जाता था। आधुनिक जीवन शैली, पीढ़ियों में अन्तर, आर्थिक-पहलू, विचारों में भिन्नता आदि के कारण आजकल की युवा पीढ़ी निष्ठुर और कर्तव्यहीन हो गई है। जिसका खामिया...

काले धनिक कितने महान

लोकनाथ तिवारी (Lokenath Tiwary) हमारे देश में काले धन से महान बने अमीर पूज्यनीय व्यक्ति हैं। वैसे अपने देश में यह कहावत हर छोटे-बड़े खूब चाव से कहते हैं कि जो पकड़ा गया वही चोर है। जब तक पकड़े नहीं गये तब तो उनके नाम के आगे कसीदे पढ़े जाते हैं। अभी दो दिन पहले तक लग रहा था कि इस हरकत में कुछ लोग ही शामिल हैं। कुछ बैंक कर्मचारी, कुछ मैनेजर, कुछ सोने के व्यापारी नोटबंदी के बाद के हालात का फायदा उठाते हुए चांदी काट रहे हैं। अब तो पद्म भूषण से सम्मानित डॉक्टर सुरेश आडवाणी पर 10 करोड़ रुपये के प्रतिबंधित नोटों की हेराफेरी का आरोप लगा है। फिलहाल सीबीआई ने मामला दर्ज कर लिया है और सीबीआई की एक टीम आरोपों की जांच में जुटी है। 8 नवंबर के बाद कालेधन के खिलाफ छिड़ी मुहिम में अब तक आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और तमाम जांच एजेंसियां अरबों के कालेधन का खुलासा कर चुकी है। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित टीएंडटी लॉ फर्म के मालिक रोहित टंडन, कोलकाता के बड़े कारोबारी पारसमल लोढ़ा से लेकर कई सफेदपोश शख्सियतें अभी तक इस कालेधन के खेल में बेनकाब हो चुकी हैं। सूरत के चाय बेचने वाले अरबपति किशोर भजियावाला की संपत्त...

मैं पीता नहीं हूं, पिलायी गयी है

लोकनाथ तिवारी (Lokenath Tiwary) कौन कहता है कि मैं पियक्कड़ हूं। अरे भई इसमें मेरा दोष नहीं बल्कि यह तो मेरे जीन का दोष है। हमारे शरीर में एक ऐसा जीन है, जिसके कमजोर पड़ते ही हम पर पियक्कड़ी का भूत सवार हो जाता है। वैज्ञानिकों ने मानव शरीर में एक ऐसा जीन खोज निकाला है, जो लोगों को एक हद से ज्यादा शराब पीने से रोकता है। बीटा क्लोथो नाम का यह जीन व्यक्ति के अंदर शराब के उपभोग को एक सीमा से ज्यादा न बढ़ाने की इच्छा पैदा करता है। अगर यह बीटा क्लोथो कमजोर पड़ जाये तो हम मधुशाला की डगर पर चलने को मजबूर हो जाते हैं। टेक्सास यूनिवर्सिटी ने इसके लिए एक लाख से भी ज्यादा लोगों पर शोध किया और पाया कि जिन लोगों में यह जीन था, उनमें बेतरह पीने की लत नहीं थी। इसके बाद वैज्ञानिकों ने कुछ चूहों में यह जीन डालकर एक और प्रयोग किया, तो पाया कि इस जीन वाले चूहों को शराब की लत नहीं लगी। उन्होंने पाया कि इस जीन की वजह से हमारे लीवर में बीटा क्लोथो नाम का एक हार्मोन पैदा होता है। इस हार्मोन के असर करने की प्रक्रिया बड़ी जटिल होती है। लेकिन जब यह हार्मोन सक्रिय होता है, तब पीने वाले के मस्तिष्क को यह संदेश भेजता ह...

नोटबंदी के खिलाफ आंदोलन पड़ा कुंद

नोटबंदी के बाद गांवों में लोग अपने ही पैसे के लिए मारे मारे फिर रहे हैं, लेकिन विपक्षी शहरों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लगन (शादी विवाह) के समय में लोगों की इज्जत दाव पर लगी है। किसानों की जमीन में नकदी बिना सिंचाई नहीं हो पा रही, लेकिन विरोधी पार्टियां इस मौके का लाभ लेने में विफल रहीं। इनका विरोध केवल शहरों तक सीमित रहा। लोगों की सहानुभ्ाूति अर्जित करने में विपक्षी पार्टियां नाकाम रही हैं। नोटबंदी के बाद कितना कालाधन आया या कितने लोग पकड़े गये, इसकी आम जनों को फिक्र नहीं है। इसका लाभ या नुकसान पता करने में सरकार भी नाकाम है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी स्पष्ट किया है कि नोटबंदी के बाद कितना कालाधन बैंकों में जमा हुआ यह बताना मुमकिन नहीं है। ऐसे में आंकड़ों की बाजीगरी बताने के बजाय ग्रामीणों व किसानों की समस्या पर बहस हो तो विपक्ष को माइलेज मिल सकती है। यहां तो विपक्ष ख्ाुद ही बिखरा हुआ है। संसद का शीतकालीन सत्र बेवजह नोटबंदी की भेंट चढ़ गया। कमजोर और बिखरा विपक्ष अकसर सत्तारूढ़ दल को निरंकुश बना देता है, यह बात नोटबंदी के फैसले से उजागर हुई। एक बेहद संवेदनशील और अहम मुद्दे पर कांग...